सोमवार, 29 जून 2020

Geeta में लिखी 10 भयंकर बातें , कलियुग में हो रही हैं सच !!

हेलो दोस्तों आपका स्वागत है हमारे ब्लॉग Pageofhistory मे | तो दोस्तों आज हम आपको हमारे ब्लॉग में History Of India In Hindi बताएंगे की Geeta में क्या 10 बाते है | हमारी History Of India में ये पहले ही बता दिया गया था की आगे भविष्य में क्या होगा | 

Geeta में कही गई है यह 10 भयानक बातें जो कलयुग में सच हो रहे हैं | कौन सी है वह 10 बातें आइए जानते हैं |  



Geeta Saar



1.पहली बात कलयुग में धर्म,स्वच्छता,सत्यवादीता,स्मृति,शारीरिक शक्ति,दया,भाव और जीवन की अवधि तक घटती जाएगी | 


2.दूसरी बात कलयुग में गुणी वही व्यक्ति माना जाएगा | जिसके पास अधिक धन है न्याय और कानून सिर्फ एक शक्ति के आधार पर होगा | 


3.तीसरी बात कलयुग में स्त्री पुरुष बिना विवाह के केवल रूचि के अनुसार ही रहेंगे |  मनुष्य व्यापार की सफलता के लिए छल करेगा और ब्राह्मण सिर्फ नाम के होंगे | 


Geeta - pageofhistory


4.चौथी बात घूस देने वाले व्यक्ति ही न्याय पा सकेंगे और जो धन नहीं खर्च कर खर्च कर पाएगा | उसे न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खानी होगी स्वार्थी और चालाक लोगों को कलयुग में विद्वान माना जाएगा | 


5.पांचवी बाद कलयुग में लोग कई तरह की चिंताओं में घिरे रहेंगे लोगों को कई तरह की चिंताएं सताएगी | और -नुष्य की उम्र घटकर सिर्फ 70 - 80 साल की रह जाएगी | 


6.छठी  बात लोग दूर के नदी तालाबों और पहाड़ों को तीर्थ स्थान मानकर वहा जाएंगे | लेकिन अपनी ही माता-पिता  का अनादर करेंगे | सर पर बड़े बाल रखना खूबसूरती मानी जाएगी और लोग पेट भरने के लिए हर बुरे प्रकार के बुरे काम करेंगे |


7.सातवीं बात कलयुग में बारिश नहीं पड़ेगी और हर जगह सूखा होगा मौसम बहुत विचित्र अंदाज़ ले लेगा | 

कभी तो भीषण सर्दी होगी तो कभी असहनीय गर्मी कभी आंधी तो कभी बाढ़ आएगी | और इन्हीं परिस्थितियों से लोग परेशान रहेंगे | 


Geeta 3- pageofhistory



8.आठवीं बात कलयुग में जिस व्यक्ति के पास धन नहीं होगा | उसे लोग अपवित्र,बेकार और अधर्मी मानेंगे | विवाह के नाम पर सिर्फ समझौता होगा | लोग स्नान को ही शरीर का शुद्धिकरण समझेंगे | 


9.नवी बात लोग सिर्फ दूसरों के सामने अच्छा दिखने के लिए धर्म,कर्म के सारे काम करेंगे | कलयुग में दिखा बहुत होगा और पृथ्वी पर भ्रष्ट लोग भारी मात्रा में होंगे | लोकसत्ताकी  शक्ति हासिल करने के लिए किसी को मारने से भी पीछे नहीं हटेंगे | 


10.दसवीं बात पृथ्वी के लोग अत्यधिक कर और सूखे की वजह से घर छोड़ पहाड़ों पर रहने के लिए मजबूर हो जाएंगे |  कलयुग में ऐसा आएगा जब लोग पत्ते,माँस,फूल और जंगली शहद जैसी चीजें खाने को मजबूर होंगे | Geeta में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा लिखी गई यह बातें इस कलयुग में सच होती दिखाई दे रहे हैं | हिंदू धर्म कितना पुराना है हमें गर्व है कि श्री कृष्ण जैसे अवतारों ने पृथ्वी पर आकर कलयुग की भविष्यवाणी इतनी पहले ही कर दी थी लेकिन फिर भी आज का मनुष्य अभी तक कोई सबक नहीं ले पाया उम्मीद है दोस्तों यह जानकारी आपको अच्छी लगी होगी | History Of India In Hindi मे जानने के लिए पढ़ते रहे हमारा ब्लॉग | धन्यवाद् 


 

Bhagwat Geeta-Pageofhistory


गुरुवार, 25 जून 2020

Bharat Ko Sone Ki Chidiya Kyu Kaha Jata Tha?


Bharat Ko Sone Ki Chidiya Kyu Kaha Jata Tha - History Of India In Hindi 


अगर आप भारतीय इतिहास के पन्नों को पलट कर देखेंगे तो आपको उसमें एक ऐसे दौर का जिक्र भी मिलेगा जब भारत पूरी दुनिया में विश्व गुरु के तौर पर अपनी एक अलग ही पहचान रखता था | पूरी दुनिया भारत को सोने की चिड़िया के नाम से जानती थी क्योंकि यह देश हर तरह से समृद्धि था और इसीलिए इस सोने की चिड़िया पर बाहरी लोगों ने बार बार आक्रमण किया है और यहां की दौलत लूट कर लुटेरे अपने अपने देश ले गए हैं इस देश की जनता को देखकर ही बाहरी लोगों ने भारत की सरजमीं पर आकर इस सोने की चिड़िया को गुलामी की जंजीरों में जकड़ कर रख लिया था पर क्या आप यह जानते हैं कि भारत को सोने की चिड़िया क्यों कहा जाता था तो आज के इस पोस्ट में हम महान भारत के उस महान गाथा के बारे में बात करेंगे कि सबसे पहले किसने सोने की चिड़िया नाम से संबोधित किया था | किसकी वजह से भारत को सोने की चिड़िया का खिताब मिला था | किन-किन चीजों का उत्पादन और किन-किन चीजों की निर्यात करता था | 

 

उस समय भारत की अर्थव्यवस्था कितनी थी फिर मुगल काल में अर्थव्यवस्था कितनी थी | अंग्रेज काल में और आज भारत की अर्थव्यवस्था कितनी है | सोने के सिक्के बनने शुरू कब हुए थे | ऐसे कई मुद्दों पर हम बात करेंगे | सबसे पहले हम बात करेंगे कि भारत को सोने की चिड़िया क्यों कहा जाता था तो मौर्य एंपायर के दौरान भारत धीरे-धीरे समृद्ध होने लगा क्योंकि उनके अलग-अलग राजाओं ने अच्छे से शासन किया | गुप्ता एंपायर आते-आते भारत दुनिया का सबसे समृद्ध देश बन गया था | इसलिए भारत को पहली सदी से लेकर 11 वीं शताब्दी तक सोने की चिड़िया कहा जाता था | 




Sone ki chidiya - pageofhistory




प्राचीन भारत वैश्विक व्यापार का केंद्र था | यह दुनिया का सबसे विकसित देश था उस समय भारत मसालों के व्यापार में दुनिया का सबसे बड़ा देश दुनिया के संपूर्ण उत्पादन का 40% हिस्सा अकेले भारत में उत्पादन होता था|  दुनिया की कुल आय का 27% हिस्सा भारत का होता था क्योंकि उस समय भारत में घर-घर में कपास से सूत बनाया जाता था लोहे के औजार बनाए जाते थे | हर घर में लघु उद्योग थे कुछ लोग आज भी मानते हैं कि भारत प्राचीन काल में सिर्फ मसालों के निर्यात मे ही आगे था | लेकिन भारत मसालों के अलावा चीजों के निर्यात में दुनिया का सबसे अग्रणी देश था | 




तो अब हम उन चीजों की बात करेंगे जो भारत से काफी मात्रा में निर्यात की जाती थी जिसमें कपास,चावल,गेहूं,चीनी जबकि मसालों में मुख्य रूप से हल्दी,कालीमिर्च,दालचीनी,जटामांसी इत्यादि शामिल थे |  इसके अलावा आलू,तिल का तेल,हीरे,नीलमणि के साथ-साथ पशु उत्पादन,रेशम, शराब और धातु उत्पादन जैसे ज्वेलरी,चांदी के बने पदार्थ निर्यात किए जाते थे | इसलिए हर दृष्टि से सुंदर,समृद्धि,वेद,व्यापार,मंडल और राजाओं का देश और नदिया और महासागरों से भरा जंगली जानवर पशु और हाथियों से समृद्ध अलग-अलग धर्म अलग-अलग भाषाएं हर क्षेत्र में आगे था | 


यहाँ सामान के बदले सोना लिया जाता था इसलिए सभी देश भारत के साथ व्यापर करना चाहते थे | धीरे-धीरे यहां पर वस्तु विनिमय को बदलकर मुद्रा का उपयोग शुरू हुआ | तब  सोने के बने मुद्रा का उपयोग किया जाने लगा |  धीरे-धीरे चांदी के सिक्के का प्रचलन आया | और भी ऐसे बहुत से कारण थे जिससे भारत को सोने की चिड़िया का ख़िताब मिला |  



इसके अलावा और भी कई कारण थे तो अब हम उसके बाद करेंगे तो सातवीं सदी बाद भारत में बाहरी लोगों के आक्रमण शुरू हो गए थे | जिसमें तुर्क,अरबी,इस्लामिक,गाने,पुर्तगाली,डच और आखिर में अंग्रेज शामिल थे | जिसमें 1000 साल के मुगल और अन्य आक्रमणकारियों के शासन के बाद भी दुनिया की जीडीपी में अकेले भारत की अर्थव्यवस्था का योगदान 25% के बराबर था | मुगलों के शासन के पहले भारत 1 से 11 वीं सदी के बीच दुनिया के सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी | और जब मुगलों ने 1526 से लेकर 1793 के बीच भारत पर शासन किया | उस समय भारत की आय 17 पॉइंट 5 मिलियन पाउंड थी जो की ग्रेट ब्रिटेन की आय से ज्यादा थी |  साल 1600 भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी 1305 डॉलर थी इसी समय ब्रिटेन के प्रति व्यक्ति जीडीपी 1137 डॉलर अमेरिका की प्रति व्यक्ति 897 डॉलर और चाइना की प्रति व्यक्ति जीडीपी 940 डॉलर और यह मेरे आकड़े नहीं है यह इतिहास बताता है |



मीर जाफर ने ईस्ट इंडिया कंपनी 1757 मे 9 मिलियन पौंड का भुगतान किया था | यह सनातन सत्य भारत की सम्पनता को दर्शाने के लिए बड़ा सबूत है पर इस समय भारत की अर्थव्यवस्था की बात करें तो साल पंद्रह सौ के आसपास दुनिया की आय में भारत की हिस्सेदारी 24.5 % थी | जो कि पूरे यूरोप की आय के बराबर थी और उसके बाद अंग्रेजों ने भारत पर कब्जा किया और अंग्रेजों ने भारत की अर्थव्यवस्था तहस - नहस कर दिया | 

जब अंग्रेज  भारत को छोड़कर गए तब भारत का विश्व अर्थव्यवस्था में योगदान मात्र 2 से 3% रह गया था | इस हद तक उन्होंने भारत को लूट लिया था | लेकिन जब भारत विश्व गुरु था उस समय में सिक्कों को बनाने वाले पहले देशों में शामिल हुआ था | आज से 26 साल पहले भारत के महाजनपदों में चांदी के सिक्के के साथ शिक्षा प्रणाली शुरू की थी | 



ग्रीक के साथ-साथ पैसे पर आधारित व्यापार को अपनाने वाले पहले देश में भारत का स्थान अग्रणी था | लगभग 350 ईसा पूर्व में चाणक्य ने भारत में मौर्य साम्राज्य के लिए आर्थिक संरचना की नीव डाली थी |अब भारत को सोने की चिड़िया कहते थे | तो उसके पास सोने की कुछ बेशकीमती चीजें भी थी | सबसे पहले मोर सिहासन के बारे में बात करेंगे | भारत में मोर सिहासन था जिसे मयूर शासन के तख्ते ताऊस भी कहते हैं इस आसन को बनाने के लिए जितना धन लगाया गया था इतने धन में तो दो ताजमहल का निर्माण किया जा सकता था | मयूर सिंहासन का निर्माण शाहजहां द्वारा 70 वीं शताब्दी में शुरू किया गया था जिसे बनाने के लिए करीब 1000 किलो सोने और बेशकीमती पत्थरों का प्रयोग किया गया था और इस पर बेशकीमती हीरे भी जड़े थे |  मयूर सिंहासन की कीमत उसमें लगे कोहिनूर हीरे के कारण बहुत बढ़ गई थी | इसलिए इतना कीमती होने के कारण साल 1739 में नादिरशाह से लूटकर ले गया था | 




उसके बाद कोहिनूर हीरा कोहिनूर हीरा दुनिया का सबसे बड़ा हीरा है | जिसका वजन 21 ग्राम है और बाजार में इसकी वर्तमान कीमत $1000000000 आंकी जाते हैं | यहां गोलकुंडा की खदान से मिला था | जो आंध्र प्रदेश में है और दक्षिण भारत के राजवंश को इसका प्राथमिक हकदार माना जाता है | इसे कहीं देश पाने के प्रयास कर रहे हैं आजकल यह हीरा ब्रिटेन की महारानी के मुकुट की शोभा बढ़ा रहा है यह हिरा भारत की भूमि में हीरा पाया गया था | जो भारत का वैभव को दर्शाता है उसके बाद मंदिरों में सोने के भंडार वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने कुछ समय पहले एक आंदोलन में कहा था कि भारत में अभी भी 22000 टन सोना लोगों के पास है जिसमें लगभग 3000 से 4000 टन सोना भारत के मंदिरों में अभी भी है | एक अनुमान के मुताबिक भारत के 13 मंदिरों के पास भारत के सभी अरबपतियों से भी ज्यादा धन है | 




मंदिर के आंकड़ों के हिसाब से देखा जाए तो भारत कल भी सोने की चिड़िया था और आज भी है |  भारत के कुछ मंदिरों में इतना सोना रखा हुआ है कि कुछ राज्यों के पूरी आईपी मंदिरों की आय से कम है | अगर साल दो हजार अट्ठारह उन्नीस के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि केरल सरकार के वार्षिक आय 1 पॉइंट जीरो तीन लाख करोड़ है जो कि इतने केरल पद्मनाथ स्वामी मंदिर के किसी कोने से मिल जाएगा | 

तो इसके बाद हम उसी मंदिर की बात करेंगे पद्मनाथ स्वामी मंदिर यहां मंदिर केरल राज्य के त्रिभुवनपुरम में स्थापित है जो 5000 साल पुराना है यह दुनिया के सबसे रहस्यमई मंदिरों में से एक है क्योंकि इसमें एक दरवाजे का रहस्य है जिसे आज तक कोई नहीं खोल पाया आज भी दरवाजे पर क्वेश्चन मार्क लगा है | इस मंदिर में 6 तयखाना है जिन्हें ए बी सी डी ई एफ नाम दिया गया है | उसमें से कुछ दरवाजे तो खुल गए है जिसमें बेशकीमती सोना हीरा रत्ना मूर्तियां और कई कीमती रत्न है जिनकी कीमत लगाना भी मुश्किल है पर इसमें बी दरवाजे को आज तक कोई नहीं खोल पाया |


उसके बाद मोहम्मद गजनी के लूट :-

मोहम्मद गजनी का सोमनाथ के मंदिर पर हमला करने के लिए 2 सबसे बड़े उद्देश्य थे एक इस्लाम का प्रचार करना और दूसरा भारत से धन की लूट करना मोहम्मद गजनी ने नवंबर 1001 में पेशावर के युद्ध में जयपाल को हराया था | 



गजनी ने इस युद्ध में चार लाख सोने के सिक्के लुटे और एक सिक्के का वजन 120 ग्राम था | इसके अलावा उसने राजा के लड़कों और राजा जयपाल को छोड़ने के लिए भी 4 पॉइंट 5 लाख सोने के सिक्के लिए थे | आज के समय के हिसाब से एक अरब डॉलर की लूट की थी राजा जयपल के वहा से की थी | और उसने ही सोमनाथ मंदिर को भी लूटा था | साल 1025 में मोहम्मद ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर को लूटा था | इस दौरान उसने 2 मिलियन दीनारों की लूट की थी उस समय के हिसाब से यह बहुत बड़ी लूट थी | 




खनिज और उनका उपयोग:-

भारत में खनिजों का भंडार है जैसे सोना,लोहा,तांबा,मैग्नीज,टाइटेनियम,क्रोमाइट,बॉक्साइट,केनाईट,सोना पत्थर,नमक, हीरा,परमाणु खनिज जिप्सम,अभ्रक आदि का भारत में न केवल उत्पादन किया जाता था बल्कि देश विदेशों में निर्यात किया जाता था | ओड़िसा से सबसे अधिक बॉक्साइट और मैगजीन का उत्पादन होता है
| कोयले के उत्पादन में भारत तीसरे नंबर पर है उसके बाद कृष्णा नदी पर स्वर्णरेखा नदी कृष्णा नदी है | जिस पर देश-विदेश के लोगों की नजर टिकी है सोना उगलने वाली यह नदी झारखंड की घाटियों में बहती है इस नदी से सैकड़ों सालों से सोने के कण निकल रहे हैं | इस बात का आज तक पता नहीं चला कि यह सोने के कण कहां से इस नदी में आ रहे हैं 

यहाँ रहने वाले स्थानीय निवासी इस नदी की रेत में से चांद कर सोने के कान निकाल कर बहुत सस्ते दाम में बेच देते हैं | यह दुनिया में एकमात्र नदी है जो सोना उगलती है तो ऐसी कई बाते है जो यह साबित करती हैं कि यह देश सोने की चिड़िया क्यों था | 

बुधवार, 24 जून 2020

Dr APJ Abdul Kalam Biography In Hindi - Pageofhistory

आज 21 वी शताब्दी भारत जहां भी है बहुत संघर्ष के बाद है पहला संघर्ष देश की गुलामी थी और दूसरा संघर्ष देश में कोई तकनीक नहीं थी | कैसे ना कैसे करके देखो आजाद हो गया था लेकिन देश के भविष्य का क्या होगा किसी को कुछ नहीं पता था | भारत के लिए आजादी मिलना बहुत बड़ी बात थी | लेकिन आजादी मिलने के बाद अमरीका फ्रांस चाइना यह सब बड़े बड़े देशों से भारत को हर रोज धमकिया मिला करती थी | और इसी दौरान भारत में एक ऐसे इंसान का जन्म हुआ जिसने भारत देश को अपने कंधे पर रखकर इस मुकाम पर खड़ा कर दिया और आज 21वीं सदी में भारत जहां भी है उनके बहुत बड़े योगदान के वजह से है | मैं आपसे बात कर रहा हूं मैं मिसाइल मैन ऑफ इंडिया  Dr APJ Abdul Kalam जी के बारे में जिनकी वजह से आज अपना भारत रसिया, नॉर्थ कोरिया, अमेरिका जैसे बड़े-बड़े देशों को टक्कर दे पाता है क्योंकि पहले के समय भारत में कोई तकनीकी नहीं थी इस वजह से भारत की कोई इज्जत नहीं होती थी | और किसी भी देश की वैल्यू उसके टेक्नोलॉजी के द्वारा देखी जाती है| 




Dr APJ Abdul Kalam जी ने भारत को तकनीक दिया मिसाइल दिया न्यूक्लियर वेपन दिया और साथ ही साथ भारत को न्यूक्लियंस बना दिया  | जो कि यह सब बातें बहुत गर्व की है तो चलिए दोस्तों शुरू से Dr APJ Abdul Kalam जी के बहुत ही इंटरेस्टिंग स्टोरी के बारे में जानते हैं  APJ Abdul Kalam जी का जन्म 15 अक्टूबर 1931 में तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक बहुत ही गरीब परिवार में हुआ था | उनके माता-पिता कोई खास पढ़े-लिखे नहीं थे | जिस वजह से उनके पिता  Jainulabuddin Marakayar नांव चलाया करते थे | जिससे कि उनकी घर की रोजी रोटी बहुत मुश्किल से  चलती थी | APJ Abdul Kalam जी अपनी स्कूलिंग पास के गांव से ही किया करते थे |  लेकिन जब उनकी उम्र 7 से 8 साल हुई तो एक बार की बात है कि रामेश्वरम में एक बहुत भयंकर साइक्लोन आती है जिससे कि उनके पिताजी की नांव बह  जाती है | जिससे उनका सारा काम चौपट हो जाता है| 



Abdul Kalam-Pageofhistory




जिस वजह से उनके  पास घर चलाने के लिए एक भी पैसा नहीं होता हैं इसी कारण APJ Abdul Kalam जी अपने घर के रोजी रोटी के लिए World War 2nd के दौरान Newspaper India बेचा करते थे |करीब 8 साल की उम्र से ही  उन्होंने अपने जीवन मे संघर्ष करना शुरू कर दिया था | एक तो पहले ही गरीब परिवार में पैदा हुए थे ऊपर से सिर्फ 8 साल की उम्र में उनको घर चलाना पड़ता था | लेकिन इतनी कठनाई और मुश्किलों के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई कभी नहीं छोड़ी और 8 साल की उम्र में स्कूल से लौटने के बाद कमाने के लिए चले जाया करते थे | Wings of Fire: An Autobiography of A P J Abdul Kalam (1999) के मुताबिक उनका यह कहना था | मैं तो बहुत गरीब परिवार में पैदा हुआ ही था लेकिन बहुत खुश नसीब था जो इस परिवार में पैदा हुआ था | क्योंकि उनके मम्मी-पापा भले पढ़े-लिखे नहीं थे | लेकिन वह लोग एपीजे अब्दुल कलाम जी से बात को समझा कर देते हैं और साथ ही साथ उनको खूब सपोर्ट भी किया करते थे | 




उनकी मम्मी Ashiamma Jainulabiddin उनको कुरान की बहुत सारी कहानियां सुनाया करती थी | अब्दुल कलाम जी को बचपन से ही सीखाया था  कि क्या गलत है और क्या सही है और उनके पिताजी  Jainulabuddin Marakayar  भले ही नांव चलाया करते थे | एक छोटा काम किया करते थे लेकिन वह एक बहुत ही सज्जन और ईमानदार व्यक्ति थे | इसी के साथ उन्होंने अपनी हाई स्कूल रामनाथपुरम का श्वार्ट्ज हाई स्कूल से पूरा किया फिर 4 साल के लिए सेंट जोसेफ कॉलेज में पढ़ाई की गई |  सब डिग्री कंप्लीट होने के बाद इंजीनियरिंग करना चाहते थे और उन्होंने मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में एडमिशन के लिए अप्लाई किया और उनका सिलेक्शन तो हो जाता है लेकिन एडमिशन के लिए पैसे नहीं होते हैं | उन्हें एडमिशन के लिए ₹1000 की जरूरत होती है लेकिन उस समय 1000 बहुत बड़ी बात होती थी जिस वजह से उनके एडमिशन के लिए उनकी बहन असीम जोहरा ने अपने सोने के कंगन को बेचकर अब्दुल कलाम जी का एडमिशन एमआईटी में करवाया और यह बात अब्दुल कलाम जी को बहुत बुरी लगी उनको खुद को पर बहुत शर्मिंदगी महसूस हो रही थी | 




इस वजह से उन्होंने कसम खाई की इतनी मेहनत और सपोर्ट के बाद मुझे जीवन में बहुत कुछ करना है करना और जिसका जितना लिया है सब को वापस करके रहना है | उन्होंने जितना जिसका लिया था उतना तो दिया ही लेकिन साथ ही साथ उन्होंने भारत को बहुत कुछ दिया | 

एमआईटी से इंजीनियरिंग कंप्लीट करने के बाद और ट्रेनिंग के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड मे चले गए जो कि बेंगलुरु में था | ट्रेनिंग कंप्लीट करने के बाद वह एयरफोर्स में जाना चाहते थे जिस वजह से अब्दुल कलाम जी देहरादून जाकर एयरपोर्ट के लिए अप्लाई किए जिसमें 22 लोगों में से सिर्फ 8 लोगों का सिलेक्शन होना था परन्तु 8 लोगो को सिलेक्शन तो हो गया और उनका स्थान 9 वा था | इस  कारण उनका सपना टूट जाता है |  उनको कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि अब आगे क्या किया जाए | उनको खुद के ऊपर बहुत शर्म आ रही थी कि परिवार वालों ने इतना सपोर्ट किया यहां तक एडमिशन के लिए अपने सोने का कंगन बेच दिया| 




इतना सब कुछ करने के बाद भी वह अपने सपने को पूरा नहीं कर पाए फिर कलाम जी ने एयर फोर्स का सपना ऐसे ही छोड़ दिया | 

 फिर वह अपने रास्ते इंजीनियरिंग में बिल्कुल सीधे चलते जा रहे थे और बाद में इंडियन मिनिस्ट्री में सीनियर साइंटिस्ट असिस्टेंट से सेलेक्ट हो गए हैं इंडिया में बहुत सारे जगह जाते हैं बहुत सारे बड़े बड़े प्रोजेक्ट पर काम करते हैं फिर आगे जाकर उन्होंने सोचा कि इंडिया टेक्नोलॉजी के मामले में काफी पीछे हैं इंडिया के पास खुद के कोई भी हथियार  नहीं थे कोई सैटलाइट भी नहीं है | और छोटे-छोटे चीजों के लिए भारत को दूसरे देशों के पास जाना पड़ता था | 

जिस वजह से जितने भी न्यूक्लियर नेशन वाले देश हैं न्यूक्लियर नेशन वाले मतलब कि जिन जिन देशों ने नुक्लेअर बम का परीक्षण पहले से कर लिया था उन्हें न्यूक्लियर नेशन देश माना जाता है| जिस वजह से यह लोकेशन वाले पांच देश जिसका अमेरिका,चीन ,फ़्रांस सम्मिलित थे | 


यह सब भारत को बहुत ही नीचे नजर से देखा करते रहे और उनकी नजर में भारत की कोई वैल्यू नहीं थी और अगर भारत के वैज्ञानिक  कुछ नया एक्सपेरिमेंट किया करते या परीक्षण किया करते थे तो यह नूक्लिअर नेशन वाले देश भारत को इन सभी चीजों को करने के लिए रोका करते थे पाबंदी लगा दिया करते थे |  साथ ही साथ भारत के लिए नए नए रूल बना दिया करते थे | इन्हीं सभी चीजों को देखकर भारत के सभी साइंटिस्ट जिसमें कि एपीजे अब्दुल कलाम जी, विक्रम साराभाई और सतीश धवन शामिल थे इन लोगों ने उनके ऐसे रूल को नजरअंदाज करके भूल के खिलाफ एक्सपेरिमेंट किया करते थे जिससे कि भारत के पास खुद का हथियार हो क्योंकि मैंने आपको पहले ही बताया इंटरनेशनल लेवल पर किसी भी देश की वैल्यू उसके टेक्नोलॉजी से होती है क्योंकि इस मामले में भारत बिल्कुल पीछे था |बहुत ज्यादा संघर्ष करने के और मुश्किलों के बाद एपीजे अब्दुल कलाम जी ने 

देश को भारत का पहला मिसाइल दिया और बहुत सारे हथियार दिए और सैटलाइट भी दिए हैं जैसे की अग्नि,पृथ्वी,धोनी और उनके यह संघर्ष इतने थे कि आपको इमेजिन करना काफी मुश्किल होगा क्योंकि आपको जानकर हैरानी होगी | जब एपीजे अब्दुल कलाम जी इन सभी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे तो उसी दौरान 1971 में उनके टीम के लीडर विक्रम साराभाई जी की मौत हो गई थी क्योंकि उनका इस प्रोजेक्ट में बहुत बड़ा हाथ था  और उनके बिना प्रोजेक्ट आधा अधूरा रह गया था और साथ ही साथ अब्दुल कलाम जी के मम्मी और पापा दोनों लोगों की मौत इसी दौरान हुआ थी | इसका उन्हें बहुत गहरा सदमा लगा लेकिन इतना सब कुछ होने के बाद भी काफी एक्सपेरिमेंट फेल होने के बाद भी उन्होंने अपने मिशन को पूरा किया और भारत देश को सिर्फ मिसाइल ही नहीं बल्कि बहुत कुछ दिया और आज सिर्फ उनके वजह से अमेरिका,रसिआ  यह सब बड़े बड़े देश भारत को इज्जत भरी नजर से देखते हैं | एपीजे अब्दुल कलाम जी की ऐसी मेहनत और परिश्रम के कारण वह भारत के 2002 से 2007 तक प्रेसिडेंट भी रहे | 





रविवार, 21 जून 2020

Autobiography Of Narendra Modi In Hindi - Page of history

हेलो दोस्तों मे राहुल सिंह चौहान आपके लिए pageofhistory  मे आज  Autobiography Of Narendra Modi In Hindi लेकर आए  है | कि कैसा रहा उनका चाय बेचने से प्रधानमंत्री बनने  का सफर | 


डरते तो वह हैं जो अपनी छवि के लिए मरते हैं मैं तो Hindustan की छवि के लिए मरता हूं और इसीलिए किसी से भी नहीं डरता हूं ऐसा कहना है दुनिया की सबसे शक्तिशाली लोगों में शामिल है | 


History Of India In Hindi : -

भारत के इतिहास मे लोकप्रिय प्रधानमंत्री Narendra Modi का जिन्हें हमारे देश की राजनीति की वजह से आप प्यार करें या फिर नफरत लेकिन उनके कार्यों को अनदेखा नहीं कर सकते दोस्तों वैसे तो मोदी जी का जीवन बहुत ही साधारण तरीके से शुरू हुआ मगर अपनी देशभक्ति अपने जज्बे और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने ऐसी सफलता हासिल की जिसके बारे में कोई कुछ भी नहीं कह सकता था वे एक बेहद गरीब परिवार में पैदा हुए |



Biography Of Narendra Modi -Pageofhistory



अपने बचपन के दिनों में जब बच्चे खेलने कूदने में अपना समय व्यतीत करते हैं तब उन्होंने अपने घर की आर्थिक सहायता के लिए अपने पिता की दुकान में हाथ बटाए और train की डिब्बों में जा जाकर चाय बेची लेकिन दोस्तों अगर आपके अंदर अपने देश के लिए कुछ कर जाने की इच्छा होना तो कोई भी लक्ष्य कठिन नहीं रह जाता कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो आइए दोस्तों हम शुरू से मोदी जी के चाय बेचने से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक की अद्भुत सफर को detail में जानते हैं |




Narendra Modi का जन्म 17 सितंबर 1950 को Mumbai राज्य के मैदान जिले में वडनगर नाम के गांव में हुआ था दो तो बता दूं कि Mumbai राज्य पहले भारत का एक राज्य था जिसे 1 मई 1960 में अलग कर गुजरात और महाराष्ट्र बना दिया गया तो इस तरह अब मोदी जी का जन्मस्थान गुजरात राज्य के अंतर्गत आता है |



Narendra Modi के पिता का नाम दामोदरदास मूलचंद मोदी था और मां का नाम हीराबेन मोदी है जन्म के समय उनका परिवार बहुत ही गरीब था और वे एक छोटी सी कच्चे मकान में रहते थे Narendra Modi अपने माता पिता की कुल 6 संतानों में तीसरे पुत्र हैं मोदी के पिता Railway Station पर चाय की एक छोटी सी दुकान चलाती थी जिसमें नरेंद्र मोदी भी उनका हाथ बताते थे और रेल के डिब्बों में जा जाकर चाय बेचते थे लेकिन हां चाय की दुकान संभालने के साथ-साथ मोदी पढ़ाई लिखाई का भी पूरा ध्यान रखते थे मोदी के टीचर बताते हैं कि नरेंद्र पढ़ाई लिखाई में तो एक ठीक-ठाक छात्र थे लेकिन में नाटकों और भाषणों में जमकर हिस्सा लेते थे और उन्हें खेलकूद में भी बहुत दिलचस्पी थी उन्होंने अपनी स्कूल की पढ़ाई वडनगर से पूरी की




15 साल की उम्र में Narendra Modi की सगाई जशोदाबेन चमन लाल के साथ कर दी गई और फिर 17 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक न्यूज़ के अनुसार नरेंद्र और जसोदा ने कुछ वर्ष साथ रहकर बिताएं लेकिन कुछ समय बाद नरेंद्र मोदी के इच्छा से वे दोनों एक दूसरे के लिए अजनबी हो गए लेकिन नरेंद्र मोदी के जीवन लेखक ऐसा नहीं मानते हैं उनका मानना है कि उन दोनों की शादी जरूर हुई लेकिन वे दोनों एक साथ कभी नहीं रहे शादी के कुछ वर्षों बाद नरेंद्र मोदी ने घर छोड़ दिया और एक तरह से उनका वैवाहिक जीवन लगभग समाप्त हो गया |


Narendra Modi का मानना है कि एक शादीशुदा के मुकाबले अविवाहित व्यक्ति भ्रष्टाचार के खिलाफ ज्यादा जोरदार तरीके से लड़ सकता है क्योंकि उसे अपनी पत्नी परिवार और बाल बच्चों की कोई चिंता नहीं रहती बचपन से ही मोदी में देशभक्ति कूट-कूट कर भरी थी 1962 में जब भारत चीन युद्ध हुआ था उस समय मोदी Railway Staion पर जवानों से भरी ट्रेनों में उनके लिए खाना और चाय लेकर जाते थे 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय भी मोदी ने जवानों की खूब सेवा की थी |





1971 में RSS के प्रचारक बन गए और अपना पूरा समय RSS को देने लगे वह वहां सुबह 5:00 बजे उठ जाते और देर रात तक काम करते प्रचारक होने की वजह से मोदी जी ने गुजरात की अलग-अलग जगहों पर जाकर लोगों की समस्याओं को बहुत करीब से समझा और फिर भारतीय जनता पार्टी का आधार मजबूत करने में इंपॉर्टेंट रोल निभाया 1975 के आसपास में राजनीति क्षेत्रों में विवाद की वजह से उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कई राज्यों में आपातकालीन घोषित कर दिया था और तब RSS जैसी संस्थाओं पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था फिर भी मोदी चोरी-छिपे देश की सेवा करते रहें और सरकार की गलत नीतियों का जमकर विरोध किया



उसी समय मोदी जी ने एक किताब भी लिखी थी जिसका नाम संघर्ष मा गुजरात था इस किताब में उन्होंने गुजरात के राजनीति के बारे में चर्चा किया था


उन्होंने RSS के प्रचारक रहते हुए 1980 में गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में पीजी की Degree प्राप्त की आदत में बेहतरीन काम को देखते हुए भाजपा में नियुक्त किया गया जहां उन्होंने 1990 में आडवाणी की अयोध्या रथ यात्रा का भव्य आयोजन किया जिससे भाजपा के सीनियर लीडर काफी प्रभावित हुए आगे भी उनके अद्भुत कार्य की बदौलत भाजपा में उनका महत्व बढ़ता रहा था | 




आखिरकार मोदी की मेहनत रंग लाई और उनकी पार्टी ने गुजरात में 1995 के विधानसभा चुनाव में बहुमत में अपनी सरकार बना ली | 



लेकिन मोदी से कहासुनी होने के बाद शंकर सिंह बघेला ने पार्टी से रिजाइन दे दिया उसके बाद केशुभाई पटेल को गुजरात का मुख्यमंत्री बना दिया गया और नरेंद्र मोदी को दिल्ली बुलाकर भाजपा में संगठन के लिए केंद्रीय मंत्री का रिस्पांसिबिलिटी दिया गया मोदी जी ने इस रिस्पांसिबिलिटी को भी बखूबी निभाया 2001 में केशुभाई पटेल की सेहत बिगड़ने लगी थी और भाजपा चुनाव में कई सीटें भी हार रही थी | इसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने अक्टूबर 2001 में किस भाई पटेल की जगह नरेंद्र मोदी को गुजरात के मुख्यमंत्री पद की कमान सौंपी नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री का अपना पहला कार्यकाल 7 अक्टूबर 2001 से शुरू किया इसके बाद मोदी ने राजकोट विधानसभा चुनाव लड़ा जिसमें उन्होंने कांग्रेस पार्टी की अश्विन मेहता को बड़े अंतर से मात दी | 



मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए मोदी ने बहुत ही अच्छी तरीके से अपने कार्यों को संभाला और गुजरात को फिर से मजबूत कर दिया | 



उन्होंने गांव गांव तक बिजली पहुंचाई Tourism  को बढ़ावा दिया देश में पहली बार किसी राज्य की सभी नदियों को एक साथ जोड़ा गया जिससे पूरे राज्य में पानी की problem solve  हो गई | एशिया के सबसे बड़े सोलर पार्क का निर्माण भी गुजरात में हुआ और इन सबके अलावा भी उन्होंने बहुत सारे अद्भुत कार्य की और देखते ही देखते गुजरात को भारत का सबसे बेहतरीन राज्य बना दिया और वह खुद गुजरात के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री बन गए लेकिन उसी बीच मार्च 2002 में गुजरात के गोधरा कांड से नरेंद्र मोदी का नाम जोड़ा गया इस कांड के लिए Newyork Timesने मोदी प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया और फिर कांग्रेसी सहित अनेक विपक्षी दलों ने उनके इस्तीफे की मांग की दोस्तों गोधरा कांड में 27 फरवरी 2002 को गुजरात के गोधरा नाम शहर में रेलवे स्टेशन पर साबरमती ट्रेन के एसी कोच में आग लगाए जाने के बाद 59 लोगों की मौत हो गई थी जिसके बाद पूरे गुजरात में सांप्रदायिक दंगे होना शुरू हो गए और फिर 28 फरवरी 2002 को गुजरात के कई इलाकों में दंगा बहुत ज्यादा भड़क गया जिसमें 12 सौ से अधिक लोग मारे गए इसके बाद इस घटना की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय ने विशेष जांच दल बनाई और फिर दिसंबर 2010 में जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुनाया कि इन दंगों में नरेंद्र मोदी के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला




Narendra Modi ने गुजरात में कई ऐसे हिंदू मंदिरों को भी ध्वस्त कराने में थोड़ा सा भी नहीं सोचा जो सरकारी कानून कायदों के मुताबिक नहीं बने थे | हालांकि इसके लिए उन्हें विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों का भी विरोध झेलना पड़ा लेकिन उन्होंने इसकी थोड़ी सी भी परवाह नहीं की और देश के लिए जो सही था उसी काम को करते रहे उनकी अच्छी डिसीजन और कार्यों की वजह से गुजरात के लोगों ने मोदी को 4 बार लगातार अपना मुख्यमंत्री बनाया गुजरात में मोदी की सफलता देखकर बीजेपी के सीनियर नेताओं ने मोदी को 2014 के लोकसभा चुनाव का प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किया जिसके बाद मोदी ने पूरे भारत में बहुत सारी रैलियां की और साथ ही साथ उन्होंने Social Media का भी भरपूर लाभ उठाया और लाखों लोगों तक अपनी बात रखी मोदी के अद्भुत विकासशील कार्य उनकी प्रेरणादायक भाषण देश के लिए उनका प्यार और उनकी सकारात्मक सोच की वजह से उन्हें भारी मात्रा में वोट मिले और वे भारत के प्रधानमंत्री बने | 


नरेंद्र मोदी एक बहुत ही मेहनती व्यक्ति हैं वह 18 घंटे काम करते हैं और कुछ ही घंटे सोते हैं दोस्तों मोदी जी का कहना है कि कड़ी मेहनत कभी थकान नहीं लाती है वह तो बस संतोष लाती है नरेंद्र मोदी शुद्ध शाकाहारी हैं और नवरात्र के 9 दिन उपवास रखते हैं वे अपनी सेहत का भरपूर ध्यान रखते हैं और प्रतिदिन योग करते हैं भले ही वे कहीं पर भी हैं मोदी जी अपनी मां से बहुत प्यार करते हैं उनका कहना है कि मेरे पास अपनी बाबा दादा की ना ही एक पाई है और ना ही मुझे चाहिए मेरे पास अगर कुछ है तो अपनी मां का दिया हुआ आशीर्वाद है | 


शनिवार, 20 जून 2020

आखिर क्यों दुनिया में हर 100 साल के अंतराल में आती है महामारी?

आखिर क्यों दुनिया में हर 100 साल के अंतराल में आती है महामारी क्यों 20 के आंकड़े का साल दुनिया के लिए महामारी का कारण बनता है दोस्तों आज पूरी दुनिया को रुला देने और कहर मचा देने वाले कोरोना का पूरी दुनिया के साइंटिस्ट रात दिन कोरोनावायरस का इलाज खोजने में लगे हुए हैं मगर फिर भी सफलता नहीं प्राप्त कर पाए आज हम इतने एडवांस टेक्नोलॉजी के साए में होते हुए भी कोरोनावायरस का इलाज नहीं खोज पाए तो जरा सोचो आज से सैकड़ों साल पहले किसी वायरस की महामारी का इलाज कैसे होता होगा आप दुनिया का इतिहास उठाकर देख लीजिए आपको बहुत सी ऐसी घटना मिलेगी जिस वजह से करोड़ों लोग मौत के मुंह में चले गए थे लेकिन अब हम आपको जो जानकारी बताने जा रहे हैं उससे आप एक संयोग मात्र ही कह सकते हैं क्योंकि हर 100 साल पर लोट कर आती है एक महामारी | 


जिस तरह आज पूरी दुनिया को रोना की चपेट में आई है हर 100 साल में इंसानों को एक नई महामारी की दवा खोजनी पड़ती है ऐसा एक बार नहीं बल्कि पिछले 400 सालों से होता रहा है लगातार 400 सालों से महामारी पूरी दुनिया में अपना कहर मचाती है हालांकि इसमें एक बात कॉमन रही है वह हर सदी में 20 का आंकड़ा जैसे इस बार 2020 का आंकड़ा वैसे ही 1720 1820 और 1920 में महामारी हो चुकी हैं आइए जानते हैं इन 400 सालों में किस-किस महामारी हो ने कितने लोगों को मौत के घाट उतारा है और दोस्तों मैं हूं आपका दोस्त राहुल सिंह चौहान आप पढ़ रहे हैं  Pageofhistroy दोस्तों साल 1720 में से एक का अटैक सबसे पहले शुरुआत करते हैं दुनिया में फैली सबसे पहली महामारी के



Plague -प्लेग

साल 1720 जब पूरी दुनिया में प्लेग Plague फैल गया था इसे  ग्रेट प्लेगऑफ मर्शिले कहा जाता है मर्शिले फ्रांस का एक शहर है उस वक्त दुनिया में इतनी ज्यादा जनसंख्या नहीं थी फिर भी आप इस बात को जानकार अंदाजा लगा सकते हैं कि  मर्शिले में पहली फ्लाइट की वजह से 100000 लोगों की मौत हुई थी प्लेग फैलते ही कुछ महीनों में 50000 लोग मारे गए बाकी 50000 लोग अगले 2 सालों में मर गए उस वक्त लाशों का कोहराम मच गया था| साल 1807 में यह महामारी चाइना के अंदरूनी इलाकों में अपना पैर पसार चुकी थी चाइना से ही यह बीमारी भारत में पहुंची भारत में इस बीमारी की शुरुआत 1890  में हुई इसमें चाइना से ज्यादा कोहराम भारत में मचाय भारत में इस महामारी ने बड़ी संख्या में लोगों को चपेट में ले लिया फोटो में दिख रहा है कलाकार मिशेल शेर की बनाई हुई पेंटिंग इसमें उन्होंने दिखाने कोशिश की कि कैसे प्लेग ने कितने लोगों को मार डाला था 



Plague




Cholera-1820 में कोलेरा की महामारी 1720 ईस्वी के ठीक 100 साल बाद 1820 में कोलेरा नाम की महामारी ने दुनिया में अपना कोहराम मचाया था| 1820 में कोलारा ने एशियाई देशों में महामारी का रूप लिया इस महामारी में जापान खाड़ी के देश भारत,बैंकॉक,जावा,भूटान,चाइना,मॉरीशस,सीरिया इन सभी देशों को अपनी जकड़ में ले लिया कोलेरा की वजह से जावा में 100000 लोगों की मौत हुई थी |  सबसे ज्यादा मौतें थाईलैंड,फिलिपीन,इंडोनेशिया में हुई थी इस महामारी ने बड़ी संख्या में लोगों की ज़िंदगी को छीन लिया था | 



Cholera





Spanish Flu -1920 में स्पेनिश फ्लू का हमला कोलेरा  बीमारी के ठीक 100 साल बाद एक नई बीमारी स्पेनिश फ्लू का कहर बरसा वैसे यह पहला तो 1918 से ही था लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर  1920 में देखने को मिला जब प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत हुई थी | तब स्पेनिश फ्लू ने भी अपना असर दिखाना चालू कर दिया प्रथम विश्व युद्ध में जितने लोग मारे गए उसकी दोगुना लोगों को स्पेनिश फ्लू ने अपने चपेट में ले लिया था | कहा जाता है कि फ्लू की वजह से पूरी दुनिया में 5 करोड लोग मारे गए थे | इस संक्रमण ने भारत में दो करोड़ की गरीब लोगों की जान ले ली थी | इनमें से पंजाब जो कि आज के पंजाब हरियाणा हिमाचल प्रदेश और पाकिस्तान पंजाब को मिलाकर 800000 लोगों की मौत हो गई थी | यह मानव इतिहास की सबसे भीषण महामारीओं में से एक मानी जाती है 




Spanish Flu





अब आई साल 2020 की कोरोना वायरस की महामारी 

लोग कोरोना COVID-19 का नाम सुनकर ही सहम जाते है है | चाइना के वुहान शहर से शुरू हुई ये बीमारी आज पूरी दुनिया में फैल चुकी है | आज इस महामारी से लाखों लोग संक्रमित हो चुके हैं और हजाCCरों लोग इसमें मारे जा चुके हैं | और अब Covid-19 कोरोना बीमारी लोगों को अपना शिकार बनाती जा रही है |  वैज्ञानिक दिन-रात इसका टीका बनाने में लगे हुए हैं मगर आज तक सफलता हाथ नहीं लगी आज पूरी दुनिया में घरों में कैद है घरों से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है | इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब पूरी दुनिया के लोग घरों में कैद है | दोस्तों यह महामारी हर 20 साल से ही क्यों हुई है इनका इसी साल में असर क्यों होता है इन बातों को वैज्ञानिक किसी भी तरीके से साबित नहीं कर पाए लेकिन महामारियों  के मामले में यह 20 के आंकड़े का साल एक रहस्यमई साल माना जाता है अब इसके बारे में आपकी क्या राय है अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट बॉक्स में जरुर दें | 




COVID-19



गुरुवार, 18 जून 2020

Secrets Of Shangri-la Ghati In Hindi - शंगरी ला घाटी का रहस्य

हैलो दोस्तो तो आज हम Page of History मे आपके लिए लाए ऐसी पोस्ट जो पढ़ कर आपको अच्छा लगेगा यह बहुत रोचक पोस्ट है।क्या आपने कभी शंगरी ला घाटी - Shangri La Ghati  नाम  सुना है | शंग्रीला घाटी भारत और चीन सीमा पर स्थित है शंग्रीला घाटी अपने अंदर बहुत रहस्य दबाए है | जिसका आज तक कोई पता नही लगा पाया| तो चलते है हम और यह जानते है इसका रहस्य और रोचक रोचक बाते| 



शंगरी ला घाटी - Shangri La Ghati

शंगरी ला घाटी  बरमूडा ट्रायंगल की तरह बदनाम है कहा जाता है कि यहाँ जाने वाले सभी लोग गायब हो जाते है शंगरी ला घाटी तांत्रिक साधनाओ और साधना करने वाले लोगो  के रहने का केंद्र माना जाता है| जेम्स  हिल्टन ने भी इस घाटी का जिक्र अपनी पुस्तक होराइज़न मे किया हुआ है| और भी बहुत से लोगो ने इस घाटी का ज़िक्र अपनी किताबो मे किया है| शंगरी ला घाटी तिब्बत और अरुणाचल प्रदेश  बिच स्तिथ है तंत्र - मंत्र की पुस्तकों मे खास शंगरी ला घाटी का उल्लेख मिलता है | डॉ गोपीनाथ ने भी अपनी किताब मैं इसका जिक्र किया है| जो की पद्मभूषण से नवाजे गए थे| उन के अनुसार घाटी बरमूडा की जैसे ही रहस्यमई है|उनका मानना था की इसका सम्बन्ध दूसरे लोक से है| 


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 यही नहीं सुप्रसिद्ध तंत्र साहित्य लेखक  अरुण कुमार शर्मा ने अपनी पुस्तक मे इसका  विवरण दिया है जिसका नाम तिब्बत की वह रहस्यमय घाटी है | यदि आपको इसके इसके बारे मे और गहन जानना है तो आपको प्राचीन किताब जिसका नाम काल विज्ञानं है वो पढ़नी पड़ेगी | और किताब आपको तिब्बत के तिवांठ मठ के पुस्तकालय मे मिलेगी | किताब तिब्बत की भाषा  मे लिखी गई है | इन किताबो के अनुसार यह पता चलता है कि यहाँ तीन  आयामों के अलावा चौथा आयाम काम  करता है | जहा कोई भी वस्तु या व्यक्ति  पहुंचते ही वह अदृश्य हो जाती है | इसे पृथ्वी का आध्यात्मिक केंद्र भी माना जाता है |  



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कहा जाता है कि शंग्रिला घाटी को आम आदमी अपनी नज़रों से नहीं देख सकता है। युत्सुंग ने बताया है कि वह ना तो सूर्य का प्रकाश पहुंचता है और ना ही वहा चांद की रोशनी पहुंचती है। उनके अनुसार वहा तीन साधना केंद्र है।

1.ज्ञानगंज मठ
2.सिद्ध विज्ञान आश्रम
3.योग सिद्धाश्रम



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इन साधना केंद्रों पर अनेक योगी मिल जाएंगे।ये योगी पुराने काल से है यहां साधना के लिए आते है। शंग्रीला घाटी को सिद्धाश्रम भी कहा जाता है।इसका वर्णन वेदों मे, रामायण, महाभारत सभी में मिलता है। यहां लोग सैकड़ों वर्षों तक जीवित रहते है।कई लोगो ने शग्रीला घाटी का पता लगाने की कोशिश की परंतु कोई लोट कर नहीं आया सब गायब हो गए।


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सोमवार, 15 जून 2020

History Of Amer Fort In Hindi - आमेर किले का इतिहास

हेलो दोस्तों तो आज हम बात करेंगे राजस्थान के सुप्रसिद्ध पर्यटक स्थल आमेर की जो की जयपुर शहर में स्थित है| आपने बहुत सी फिल्मो में आमेर का किला तो देखा ही होगा और जो जयपुर के है या कभी आए है वह भी बिना देखे नहीं गए होंगे| आमेर के किले को देखने के बाद लोगो के मन मैं बहुत से सवाल उठते है जिसका जवाब आज हमारी पोस्ट मैं मिल जाएगा| 




Amer fort





History of Amer Fort - आमेर किले का इतिहास 

आमेर का नाम भगवान शिव के नाम अंबिकेश्चर के नाम पर रखा गया है कुछ लोगो का कहना है कि नव दुर्गा के रूप अंबा माता के नाम से आमेर का नाम लिया गया है। राजा मानसिंह द्वारा 1592 ई में आमेर का निर्माण करवाया गया। इस पहले 11 वी शताब्दी में कछवाहो का शासन रहा था। आमेर में शीला देवी का एक मंदिर भी है। आमेर का किला बहुत कलात्मकता और रचनात्मक ढंग से बना हुआ है।आमेर के किले में पानी स्त्रोत बहुत ध्यान में रखकर बनाया गया है।यह बनाए गए पानी से स्त्रोत से यहां बने तालाब बारिश के दिनों में भर जाते है और यह पानी पूरे वर्ष की पूर्ति के काफी होता है। आमेर का किला लाल पत्थर और संगमरमर से बनाया गया इसमें राजपूती शेली का प्रयोग किया गया है।आमेर किले के मुख्य द्वार को सुराजपोल कहा जाता है। यह किला इस तरह बना हुआ है कि यहां ऊपर प्रकाश और हवा की कमी महसूस नहीं होती है गर्मी में भी यह ठंडक रहती है और प्रकाश आता रहता है।सूरजपोल से अंदर जाते ही आप जलेब चोक में पहुंच जाते है। जो कि सेना के युद्ध के अभ्यास के उपयोग में लिया जाता था। आपने फिल्मों में बहुत बार देखा होगा ये तो।


Amer Fort

Amer Fort




दीवान - ए - आम - Dewan-A-Aam

दीवान ए आम का प्रयोग जनसाधारण दरबार के लिए जाता था।दीवान - ए - आम में 27 स्तंभों वाला एक हॉल है।इसके स्तंभों पर हस्थ रूपी कलाएं बनी हुई है।यहां जनसाधारण लोगो की समस्याएं और याचिकाएं और उनका निवारण किया जाता था।


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शिला देवी मंदिर - Shila Devi Mandir

जलेबी चोक के दाई और एक मंदिर है जिसे शिला देवी के नाम से जाना जाता है।ये मंदिर कछवाह राजपूती की कुलदेवी मानी जाती है। शिला देवी माता नव दुर्गा का ही रूप हैं।इस मंदिर में मुख्य द्वार पर चांदी के पत्रे से मधे हुए द्वार कि जोड़ी है। इस पर नव दुर्गा के चित्र और दस महाविद्यएं लिखी हुई है। और अंदर चांदी से बं हुए दो शेरो के बीच में माता की मूर्ति स्थापित है। 



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शीशमहल - Shish Mehal

शीशमहल को जय मंदिर भी कहा जाता है। यह महल पूरा दर्पण से बना हुआ है।इसमें बहुत रंग के शीशे उपयोग में लिए गए है।इसके अंदर बहुत है सुंदर मीनाकारी और चित्रकारी की गई है। पर्यटकों के लिए यह बहुत आकर्षक का केंद्र रहता है।यह इस तरीके से बना हुआ है कि यह एक मोमबत्ती जला कर की यह रोशनी की जा सकती है।


Amer Fort


जादुई पुष्प - Jadui Pushp

शीशमहल के स्तंभों पर नक्काशी किए गए चिजो में जादुई पुष्प आकर्षण का केंद्र रहता है।ये पुरष बहुत है अदभुत कला को प्रदर्शित करता है।इस पुष्प में सात विशिष्ट और अनोखी डिजाइन है जो इसे आकर्षण का केंद्र बनाती है। इसमें मछली की पूछ,हाथी की सूंड,नाग का फन,कमल,भुट्टा,बिच्छू, सिंह की पूछ आदि का रूपांकन किया गया है।इनमें से किसी एक को ढकने पर दूसरी वस्तु प्राप्त होती है।


Amer Fort

Amer Fort





शुक्रवार, 12 जून 2020

Facts Of Ramayan - रावण किसका अवतार था?

हैलो दोस्तो तो आज pageofhistory में आपके लिए के इस प्रश्न का गहरा अध्ययन कर आपके लिए यह जानकारी लाए है।रावण बहुत है विद्वान था रावण को शास्त्रों के का बहुत अच्छे ज्ञान था साथ ही उसे शास्त्रों,जादू और तांत्रिक विद्या में भी महारथ हासिल थी। बहुत कम लोग जानते होंगे या उन्होने ये सोचा भी नहीं होगा कि रावण जो इतना ज्ञानी था शक्तिशाली था वो आखिर है किसका अवतार?तो हम बताते है पूरे विस्तार से आपको की रावण किसका रूप है।
Ramayan


Ramayan


विष्णुपुराण के अनुसार रावण विष्णु भगवान का द्वारपाल था।एक श्राप के कारण रावण को असुर बनना पड़ा और वो भी एक बार नहीं तीन बार राक्षस योनि में जन्म लिया है रावण ने।

एक बार की बात है सनत,सनातन और सनक सनंदन कुमार चार ऋषिगण विष्णु जी से मिलने पहुंचे तो उन्हें विष्णु जी के दो द्वारपालक
जय और विजय जी पहरा दे रहे थे उन्होंने उन ऋषिगणों को अंदर जाने से रोक लिया और उन्हें अंदर नहीं जाने दिया।ऋषिगणों के बहुत निवेदन करने पर भी उन्होंने उन्हे अंदर नहीं जाने दिया तो ऋषिगणों ने उन्हे राक्षस बनने का श्राप दे दिया यह सुनकर वह दोनों बहुत घबरा गर और चिंतित हो उठे उन्होंने ऋषिगणों से श्रमा मांगी पर वह नहीं माने उन दोनों ने विष्णु जी को ये समस्या बताई विष्णु जी ने ऋषिगणों को श्राप वापस लेने को बोला परन्तु ऋषिगण बोले कि अब वह कुछ नहीं कर सकते परन्तु इसका एक उपाय है इन दोनों को तीन जन्मों तक राक्षस योनि जन्म लेना पड़ेगा और इनकी मृत्यु भगवान विष्णु के हाथो ही हो तभी इनका उद्धार संभव है ये इनके पुराने रूप में लोट आएंगे।

Ramayan


वह तीन जन्म कोन - कोन से रावण के?

पहले जन्म में तो ये दोनों द्वारपाल हिरण्याक्ष और हिरण्यकस्यपू के रूप में जन्म लिया उन दोनों का मृत्यु का कारण विष्णु भगवान है बने और दूसरे जन्म में रावण और कुंभकरण के रूप में जन्म लिया तब इनकी मृत्यु का कारण भी विष्णु भगवान बने जिन्होंने श्री राम के रूप में जन्म लिया और इन दोनों की मृत्यु का कारण बने। तीसरे जन्म में ये शिशुपाल और दंतव्रक के रूप में जन्म लिया जिसका उद्धार करने के लिए भगवान विष्णु को कृष्ण के रूप में जन्म लेना पड़ और इनका उद्धार किया।

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गुरुवार, 11 जून 2020

Facts Of Mahabharat-क्यों पांडवो को नरक जाना पड़ा और दुर्योधन को स्वर्ग?

हैलो दोस्तो तो आज हम इस विषय पर बात करेंगे कि आखिर क्यों पांडवो को नरक जाना पड़ा और दुर्योधन को स्वर्ग?  ऐसा क्या पाप हुआ था पांडवो से जो उनको नरक का द्वार देखना पड़ा।तो दोस्तो आज हम आपको pageofhistory में आपको इसके बारे गहरा अध्यन कर के बाद बताने जा रहे है।


ये तो हम सभी जानते है महाभारत का युद्ध 18 दिनों तक चलता रहा था। युद्ध के अन्तर्गत क्या - क्या घटित हुआ ये सभी जानते है क्यों की महाभारत सभी ने देखी हुई है परन्तु यह बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि पांडवो को नरक क्यों भेजा और दुर्योधन को स्वर्ग क्यों।



Mahabharat



पांडवो ने युद्ध खत्म करने के पश्चात 36 वर्षो तक राज किया उसके पश्चात राज काज अपने उतराधिकारी परीक्षित को सौप कर स्वर्ग की और निकल पड़े। उनके साथ एक कुत्ता भी था जो कि स्वम यमराज थे । स्वर्ग तक पहुंचते - पहुंचते द्रोपती और भूम,अर्जुन,नकुल सहित सहदेव ने बीच रास्ते में है अपने प्राण त्याग दिए थे युधिष्ठिर सशरीर स्वर्ग पहुंचे और वह जैसे है अंदर पहुंचे तो सर्वप्रथम उनकी नजर दुर्योधन पर गई वहा उनको देख कर वह चोक गए फिर वहां इंद्र भगवान को खड़ा पाकर उन्होन उनको प्रणाम किया और इंद्र भगवान से पूछा कि मेरे भाई और मेरी पत्नी कहा है इन्द्र भगवान ने कहा वह सब नरक में है युधिष्ठिर यह सुनकर बहुत दुखी हुए उन्होन इंद्र भगवान से नरक में जाने की इच्छा जताई भगवान इंद्र ने अपने द्वारपाल को उनको वहा छोड़ आने का आदेश दिया।

Mahabharat


द्वारपाल उन्हें नरक लोक ले गए। नरक के रास्तों पर बहुत अंधेरा था और बहुत है तेज दुर्गंध आ रही थी थोड़ा और आगे चलने पर युधिष्ठिर ने देखा कि बड़ी- बड़ी कढ़ाई में लोगो को तला जा रहा है किसी को जंजीरों से बांध कर आग में फेक दिया गया है कई लोगो को बहुत सारे कोवो के बीच में रखा गया था कोवों की चोच लोहे की थी जिससे वो उनको कष्ट पहुंचा रहे थे जगह- जगह से चीखने चिल्लाने की आवाजे आ रही थी। यह सब युधिष्ठर से देखा नहीं गया और उन्होंने द्वारपाल को वापस चलने को कहा तभी कुछ लोगो को जंजीरों से बांध कर लाया जा रहा था युधिष्ठिर के पूछने पर उन्होंने बताया वो उनके भाई और द्रोपती थे उन्होंने द्वारपाल को कहा मैं अपने भाइयों को नहीं छोड़ सकता तुम लोट जाओ। उनके ऐसा बोलते है सभी देवता वहा आए उनके आते ही सभी और सुगंध फेल गई और रोशनी हो गई तब युधिष्ठिर ने देवराज इंद्र से पूछा कि हे भगवान्  दुर्योधन को इतने पाप करने के बाद भी स्वर्ग में और हमे नरक में ऐसा अन्याय क्यों?तब देवराज बोले कि दुर्योधन ने इतने पाप किए हो परन्तु उसने अपने क्षत्रिय धर्म का पालन किया है वह अपने दृढ़ निश्चय पर अटल था उसकी परवरिश गलत थी परन्तु वह फैसले पर सदेव अटल रहा इसी कारण उसे पहले स्वर्ग का भोग करने की प्राथमिकता है। और तुम ने अपने गुरु द्रोाचार्य को छल से मारा यह तुम्हारा सबसे बड़ा पाप था इसी कारण तुम्हे पहेल नरक भोगना पड़ेगा उसके पश्चात स्वर्ग की प्राप्ति होगी।

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