गुरुवार, 25 जून 2020

Bharat Ko Sone Ki Chidiya Kyu Kaha Jata Tha?


Bharat Ko Sone Ki Chidiya Kyu Kaha Jata Tha - History Of India In Hindi 


अगर आप भारतीय इतिहास के पन्नों को पलट कर देखेंगे तो आपको उसमें एक ऐसे दौर का जिक्र भी मिलेगा जब भारत पूरी दुनिया में विश्व गुरु के तौर पर अपनी एक अलग ही पहचान रखता था | पूरी दुनिया भारत को सोने की चिड़िया के नाम से जानती थी क्योंकि यह देश हर तरह से समृद्धि था और इसीलिए इस सोने की चिड़िया पर बाहरी लोगों ने बार बार आक्रमण किया है और यहां की दौलत लूट कर लुटेरे अपने अपने देश ले गए हैं इस देश की जनता को देखकर ही बाहरी लोगों ने भारत की सरजमीं पर आकर इस सोने की चिड़िया को गुलामी की जंजीरों में जकड़ कर रख लिया था पर क्या आप यह जानते हैं कि भारत को सोने की चिड़िया क्यों कहा जाता था तो आज के इस पोस्ट में हम महान भारत के उस महान गाथा के बारे में बात करेंगे कि सबसे पहले किसने सोने की चिड़िया नाम से संबोधित किया था | किसकी वजह से भारत को सोने की चिड़िया का खिताब मिला था | किन-किन चीजों का उत्पादन और किन-किन चीजों की निर्यात करता था | 

 

उस समय भारत की अर्थव्यवस्था कितनी थी फिर मुगल काल में अर्थव्यवस्था कितनी थी | अंग्रेज काल में और आज भारत की अर्थव्यवस्था कितनी है | सोने के सिक्के बनने शुरू कब हुए थे | ऐसे कई मुद्दों पर हम बात करेंगे | सबसे पहले हम बात करेंगे कि भारत को सोने की चिड़िया क्यों कहा जाता था तो मौर्य एंपायर के दौरान भारत धीरे-धीरे समृद्ध होने लगा क्योंकि उनके अलग-अलग राजाओं ने अच्छे से शासन किया | गुप्ता एंपायर आते-आते भारत दुनिया का सबसे समृद्ध देश बन गया था | इसलिए भारत को पहली सदी से लेकर 11 वीं शताब्दी तक सोने की चिड़िया कहा जाता था | 




Sone ki chidiya - pageofhistory




प्राचीन भारत वैश्विक व्यापार का केंद्र था | यह दुनिया का सबसे विकसित देश था उस समय भारत मसालों के व्यापार में दुनिया का सबसे बड़ा देश दुनिया के संपूर्ण उत्पादन का 40% हिस्सा अकेले भारत में उत्पादन होता था|  दुनिया की कुल आय का 27% हिस्सा भारत का होता था क्योंकि उस समय भारत में घर-घर में कपास से सूत बनाया जाता था लोहे के औजार बनाए जाते थे | हर घर में लघु उद्योग थे कुछ लोग आज भी मानते हैं कि भारत प्राचीन काल में सिर्फ मसालों के निर्यात मे ही आगे था | लेकिन भारत मसालों के अलावा चीजों के निर्यात में दुनिया का सबसे अग्रणी देश था | 




तो अब हम उन चीजों की बात करेंगे जो भारत से काफी मात्रा में निर्यात की जाती थी जिसमें कपास,चावल,गेहूं,चीनी जबकि मसालों में मुख्य रूप से हल्दी,कालीमिर्च,दालचीनी,जटामांसी इत्यादि शामिल थे |  इसके अलावा आलू,तिल का तेल,हीरे,नीलमणि के साथ-साथ पशु उत्पादन,रेशम, शराब और धातु उत्पादन जैसे ज्वेलरी,चांदी के बने पदार्थ निर्यात किए जाते थे | इसलिए हर दृष्टि से सुंदर,समृद्धि,वेद,व्यापार,मंडल और राजाओं का देश और नदिया और महासागरों से भरा जंगली जानवर पशु और हाथियों से समृद्ध अलग-अलग धर्म अलग-अलग भाषाएं हर क्षेत्र में आगे था | 


यहाँ सामान के बदले सोना लिया जाता था इसलिए सभी देश भारत के साथ व्यापर करना चाहते थे | धीरे-धीरे यहां पर वस्तु विनिमय को बदलकर मुद्रा का उपयोग शुरू हुआ | तब  सोने के बने मुद्रा का उपयोग किया जाने लगा |  धीरे-धीरे चांदी के सिक्के का प्रचलन आया | और भी ऐसे बहुत से कारण थे जिससे भारत को सोने की चिड़िया का ख़िताब मिला |  



इसके अलावा और भी कई कारण थे तो अब हम उसके बाद करेंगे तो सातवीं सदी बाद भारत में बाहरी लोगों के आक्रमण शुरू हो गए थे | जिसमें तुर्क,अरबी,इस्लामिक,गाने,पुर्तगाली,डच और आखिर में अंग्रेज शामिल थे | जिसमें 1000 साल के मुगल और अन्य आक्रमणकारियों के शासन के बाद भी दुनिया की जीडीपी में अकेले भारत की अर्थव्यवस्था का योगदान 25% के बराबर था | मुगलों के शासन के पहले भारत 1 से 11 वीं सदी के बीच दुनिया के सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी | और जब मुगलों ने 1526 से लेकर 1793 के बीच भारत पर शासन किया | उस समय भारत की आय 17 पॉइंट 5 मिलियन पाउंड थी जो की ग्रेट ब्रिटेन की आय से ज्यादा थी |  साल 1600 भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी 1305 डॉलर थी इसी समय ब्रिटेन के प्रति व्यक्ति जीडीपी 1137 डॉलर अमेरिका की प्रति व्यक्ति 897 डॉलर और चाइना की प्रति व्यक्ति जीडीपी 940 डॉलर और यह मेरे आकड़े नहीं है यह इतिहास बताता है |



मीर जाफर ने ईस्ट इंडिया कंपनी 1757 मे 9 मिलियन पौंड का भुगतान किया था | यह सनातन सत्य भारत की सम्पनता को दर्शाने के लिए बड़ा सबूत है पर इस समय भारत की अर्थव्यवस्था की बात करें तो साल पंद्रह सौ के आसपास दुनिया की आय में भारत की हिस्सेदारी 24.5 % थी | जो कि पूरे यूरोप की आय के बराबर थी और उसके बाद अंग्रेजों ने भारत पर कब्जा किया और अंग्रेजों ने भारत की अर्थव्यवस्था तहस - नहस कर दिया | 

जब अंग्रेज  भारत को छोड़कर गए तब भारत का विश्व अर्थव्यवस्था में योगदान मात्र 2 से 3% रह गया था | इस हद तक उन्होंने भारत को लूट लिया था | लेकिन जब भारत विश्व गुरु था उस समय में सिक्कों को बनाने वाले पहले देशों में शामिल हुआ था | आज से 26 साल पहले भारत के महाजनपदों में चांदी के सिक्के के साथ शिक्षा प्रणाली शुरू की थी | 



ग्रीक के साथ-साथ पैसे पर आधारित व्यापार को अपनाने वाले पहले देश में भारत का स्थान अग्रणी था | लगभग 350 ईसा पूर्व में चाणक्य ने भारत में मौर्य साम्राज्य के लिए आर्थिक संरचना की नीव डाली थी |अब भारत को सोने की चिड़िया कहते थे | तो उसके पास सोने की कुछ बेशकीमती चीजें भी थी | सबसे पहले मोर सिहासन के बारे में बात करेंगे | भारत में मोर सिहासन था जिसे मयूर शासन के तख्ते ताऊस भी कहते हैं इस आसन को बनाने के लिए जितना धन लगाया गया था इतने धन में तो दो ताजमहल का निर्माण किया जा सकता था | मयूर सिंहासन का निर्माण शाहजहां द्वारा 70 वीं शताब्दी में शुरू किया गया था जिसे बनाने के लिए करीब 1000 किलो सोने और बेशकीमती पत्थरों का प्रयोग किया गया था और इस पर बेशकीमती हीरे भी जड़े थे |  मयूर सिंहासन की कीमत उसमें लगे कोहिनूर हीरे के कारण बहुत बढ़ गई थी | इसलिए इतना कीमती होने के कारण साल 1739 में नादिरशाह से लूटकर ले गया था | 




उसके बाद कोहिनूर हीरा कोहिनूर हीरा दुनिया का सबसे बड़ा हीरा है | जिसका वजन 21 ग्राम है और बाजार में इसकी वर्तमान कीमत $1000000000 आंकी जाते हैं | यहां गोलकुंडा की खदान से मिला था | जो आंध्र प्रदेश में है और दक्षिण भारत के राजवंश को इसका प्राथमिक हकदार माना जाता है | इसे कहीं देश पाने के प्रयास कर रहे हैं आजकल यह हीरा ब्रिटेन की महारानी के मुकुट की शोभा बढ़ा रहा है यह हिरा भारत की भूमि में हीरा पाया गया था | जो भारत का वैभव को दर्शाता है उसके बाद मंदिरों में सोने के भंडार वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने कुछ समय पहले एक आंदोलन में कहा था कि भारत में अभी भी 22000 टन सोना लोगों के पास है जिसमें लगभग 3000 से 4000 टन सोना भारत के मंदिरों में अभी भी है | एक अनुमान के मुताबिक भारत के 13 मंदिरों के पास भारत के सभी अरबपतियों से भी ज्यादा धन है | 




मंदिर के आंकड़ों के हिसाब से देखा जाए तो भारत कल भी सोने की चिड़िया था और आज भी है |  भारत के कुछ मंदिरों में इतना सोना रखा हुआ है कि कुछ राज्यों के पूरी आईपी मंदिरों की आय से कम है | अगर साल दो हजार अट्ठारह उन्नीस के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि केरल सरकार के वार्षिक आय 1 पॉइंट जीरो तीन लाख करोड़ है जो कि इतने केरल पद्मनाथ स्वामी मंदिर के किसी कोने से मिल जाएगा | 

तो इसके बाद हम उसी मंदिर की बात करेंगे पद्मनाथ स्वामी मंदिर यहां मंदिर केरल राज्य के त्रिभुवनपुरम में स्थापित है जो 5000 साल पुराना है यह दुनिया के सबसे रहस्यमई मंदिरों में से एक है क्योंकि इसमें एक दरवाजे का रहस्य है जिसे आज तक कोई नहीं खोल पाया आज भी दरवाजे पर क्वेश्चन मार्क लगा है | इस मंदिर में 6 तयखाना है जिन्हें ए बी सी डी ई एफ नाम दिया गया है | उसमें से कुछ दरवाजे तो खुल गए है जिसमें बेशकीमती सोना हीरा रत्ना मूर्तियां और कई कीमती रत्न है जिनकी कीमत लगाना भी मुश्किल है पर इसमें बी दरवाजे को आज तक कोई नहीं खोल पाया |


उसके बाद मोहम्मद गजनी के लूट :-

मोहम्मद गजनी का सोमनाथ के मंदिर पर हमला करने के लिए 2 सबसे बड़े उद्देश्य थे एक इस्लाम का प्रचार करना और दूसरा भारत से धन की लूट करना मोहम्मद गजनी ने नवंबर 1001 में पेशावर के युद्ध में जयपाल को हराया था | 



गजनी ने इस युद्ध में चार लाख सोने के सिक्के लुटे और एक सिक्के का वजन 120 ग्राम था | इसके अलावा उसने राजा के लड़कों और राजा जयपाल को छोड़ने के लिए भी 4 पॉइंट 5 लाख सोने के सिक्के लिए थे | आज के समय के हिसाब से एक अरब डॉलर की लूट की थी राजा जयपल के वहा से की थी | और उसने ही सोमनाथ मंदिर को भी लूटा था | साल 1025 में मोहम्मद ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर को लूटा था | इस दौरान उसने 2 मिलियन दीनारों की लूट की थी उस समय के हिसाब से यह बहुत बड़ी लूट थी | 




खनिज और उनका उपयोग:-

भारत में खनिजों का भंडार है जैसे सोना,लोहा,तांबा,मैग्नीज,टाइटेनियम,क्रोमाइट,बॉक्साइट,केनाईट,सोना पत्थर,नमक, हीरा,परमाणु खनिज जिप्सम,अभ्रक आदि का भारत में न केवल उत्पादन किया जाता था बल्कि देश विदेशों में निर्यात किया जाता था | ओड़िसा से सबसे अधिक बॉक्साइट और मैगजीन का उत्पादन होता है
| कोयले के उत्पादन में भारत तीसरे नंबर पर है उसके बाद कृष्णा नदी पर स्वर्णरेखा नदी कृष्णा नदी है | जिस पर देश-विदेश के लोगों की नजर टिकी है सोना उगलने वाली यह नदी झारखंड की घाटियों में बहती है इस नदी से सैकड़ों सालों से सोने के कण निकल रहे हैं | इस बात का आज तक पता नहीं चला कि यह सोने के कण कहां से इस नदी में आ रहे हैं 

यहाँ रहने वाले स्थानीय निवासी इस नदी की रेत में से चांद कर सोने के कान निकाल कर बहुत सस्ते दाम में बेच देते हैं | यह दुनिया में एकमात्र नदी है जो सोना उगलती है तो ऐसी कई बाते है जो यह साबित करती हैं कि यह देश सोने की चिड़िया क्यों था | 

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