बुधवार, 24 जून 2020

Dr APJ Abdul Kalam Biography In Hindi - Pageofhistory

आज 21 वी शताब्दी भारत जहां भी है बहुत संघर्ष के बाद है पहला संघर्ष देश की गुलामी थी और दूसरा संघर्ष देश में कोई तकनीक नहीं थी | कैसे ना कैसे करके देखो आजाद हो गया था लेकिन देश के भविष्य का क्या होगा किसी को कुछ नहीं पता था | भारत के लिए आजादी मिलना बहुत बड़ी बात थी | लेकिन आजादी मिलने के बाद अमरीका फ्रांस चाइना यह सब बड़े बड़े देशों से भारत को हर रोज धमकिया मिला करती थी | और इसी दौरान भारत में एक ऐसे इंसान का जन्म हुआ जिसने भारत देश को अपने कंधे पर रखकर इस मुकाम पर खड़ा कर दिया और आज 21वीं सदी में भारत जहां भी है उनके बहुत बड़े योगदान के वजह से है | मैं आपसे बात कर रहा हूं मैं मिसाइल मैन ऑफ इंडिया  Dr APJ Abdul Kalam जी के बारे में जिनकी वजह से आज अपना भारत रसिया, नॉर्थ कोरिया, अमेरिका जैसे बड़े-बड़े देशों को टक्कर दे पाता है क्योंकि पहले के समय भारत में कोई तकनीकी नहीं थी इस वजह से भारत की कोई इज्जत नहीं होती थी | और किसी भी देश की वैल्यू उसके टेक्नोलॉजी के द्वारा देखी जाती है| 




Dr APJ Abdul Kalam जी ने भारत को तकनीक दिया मिसाइल दिया न्यूक्लियर वेपन दिया और साथ ही साथ भारत को न्यूक्लियंस बना दिया  | जो कि यह सब बातें बहुत गर्व की है तो चलिए दोस्तों शुरू से Dr APJ Abdul Kalam जी के बहुत ही इंटरेस्टिंग स्टोरी के बारे में जानते हैं  APJ Abdul Kalam जी का जन्म 15 अक्टूबर 1931 में तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक बहुत ही गरीब परिवार में हुआ था | उनके माता-पिता कोई खास पढ़े-लिखे नहीं थे | जिस वजह से उनके पिता  Jainulabuddin Marakayar नांव चलाया करते थे | जिससे कि उनकी घर की रोजी रोटी बहुत मुश्किल से  चलती थी | APJ Abdul Kalam जी अपनी स्कूलिंग पास के गांव से ही किया करते थे |  लेकिन जब उनकी उम्र 7 से 8 साल हुई तो एक बार की बात है कि रामेश्वरम में एक बहुत भयंकर साइक्लोन आती है जिससे कि उनके पिताजी की नांव बह  जाती है | जिससे उनका सारा काम चौपट हो जाता है| 



Abdul Kalam-Pageofhistory




जिस वजह से उनके  पास घर चलाने के लिए एक भी पैसा नहीं होता हैं इसी कारण APJ Abdul Kalam जी अपने घर के रोजी रोटी के लिए World War 2nd के दौरान Newspaper India बेचा करते थे |करीब 8 साल की उम्र से ही  उन्होंने अपने जीवन मे संघर्ष करना शुरू कर दिया था | एक तो पहले ही गरीब परिवार में पैदा हुए थे ऊपर से सिर्फ 8 साल की उम्र में उनको घर चलाना पड़ता था | लेकिन इतनी कठनाई और मुश्किलों के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई कभी नहीं छोड़ी और 8 साल की उम्र में स्कूल से लौटने के बाद कमाने के लिए चले जाया करते थे | Wings of Fire: An Autobiography of A P J Abdul Kalam (1999) के मुताबिक उनका यह कहना था | मैं तो बहुत गरीब परिवार में पैदा हुआ ही था लेकिन बहुत खुश नसीब था जो इस परिवार में पैदा हुआ था | क्योंकि उनके मम्मी-पापा भले पढ़े-लिखे नहीं थे | लेकिन वह लोग एपीजे अब्दुल कलाम जी से बात को समझा कर देते हैं और साथ ही साथ उनको खूब सपोर्ट भी किया करते थे | 




उनकी मम्मी Ashiamma Jainulabiddin उनको कुरान की बहुत सारी कहानियां सुनाया करती थी | अब्दुल कलाम जी को बचपन से ही सीखाया था  कि क्या गलत है और क्या सही है और उनके पिताजी  Jainulabuddin Marakayar  भले ही नांव चलाया करते थे | एक छोटा काम किया करते थे लेकिन वह एक बहुत ही सज्जन और ईमानदार व्यक्ति थे | इसी के साथ उन्होंने अपनी हाई स्कूल रामनाथपुरम का श्वार्ट्ज हाई स्कूल से पूरा किया फिर 4 साल के लिए सेंट जोसेफ कॉलेज में पढ़ाई की गई |  सब डिग्री कंप्लीट होने के बाद इंजीनियरिंग करना चाहते थे और उन्होंने मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में एडमिशन के लिए अप्लाई किया और उनका सिलेक्शन तो हो जाता है लेकिन एडमिशन के लिए पैसे नहीं होते हैं | उन्हें एडमिशन के लिए ₹1000 की जरूरत होती है लेकिन उस समय 1000 बहुत बड़ी बात होती थी जिस वजह से उनके एडमिशन के लिए उनकी बहन असीम जोहरा ने अपने सोने के कंगन को बेचकर अब्दुल कलाम जी का एडमिशन एमआईटी में करवाया और यह बात अब्दुल कलाम जी को बहुत बुरी लगी उनको खुद को पर बहुत शर्मिंदगी महसूस हो रही थी | 




इस वजह से उन्होंने कसम खाई की इतनी मेहनत और सपोर्ट के बाद मुझे जीवन में बहुत कुछ करना है करना और जिसका जितना लिया है सब को वापस करके रहना है | उन्होंने जितना जिसका लिया था उतना तो दिया ही लेकिन साथ ही साथ उन्होंने भारत को बहुत कुछ दिया | 

एमआईटी से इंजीनियरिंग कंप्लीट करने के बाद और ट्रेनिंग के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड मे चले गए जो कि बेंगलुरु में था | ट्रेनिंग कंप्लीट करने के बाद वह एयरफोर्स में जाना चाहते थे जिस वजह से अब्दुल कलाम जी देहरादून जाकर एयरपोर्ट के लिए अप्लाई किए जिसमें 22 लोगों में से सिर्फ 8 लोगों का सिलेक्शन होना था परन्तु 8 लोगो को सिलेक्शन तो हो गया और उनका स्थान 9 वा था | इस  कारण उनका सपना टूट जाता है |  उनको कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि अब आगे क्या किया जाए | उनको खुद के ऊपर बहुत शर्म आ रही थी कि परिवार वालों ने इतना सपोर्ट किया यहां तक एडमिशन के लिए अपने सोने का कंगन बेच दिया| 




इतना सब कुछ करने के बाद भी वह अपने सपने को पूरा नहीं कर पाए फिर कलाम जी ने एयर फोर्स का सपना ऐसे ही छोड़ दिया | 

 फिर वह अपने रास्ते इंजीनियरिंग में बिल्कुल सीधे चलते जा रहे थे और बाद में इंडियन मिनिस्ट्री में सीनियर साइंटिस्ट असिस्टेंट से सेलेक्ट हो गए हैं इंडिया में बहुत सारे जगह जाते हैं बहुत सारे बड़े बड़े प्रोजेक्ट पर काम करते हैं फिर आगे जाकर उन्होंने सोचा कि इंडिया टेक्नोलॉजी के मामले में काफी पीछे हैं इंडिया के पास खुद के कोई भी हथियार  नहीं थे कोई सैटलाइट भी नहीं है | और छोटे-छोटे चीजों के लिए भारत को दूसरे देशों के पास जाना पड़ता था | 

जिस वजह से जितने भी न्यूक्लियर नेशन वाले देश हैं न्यूक्लियर नेशन वाले मतलब कि जिन जिन देशों ने नुक्लेअर बम का परीक्षण पहले से कर लिया था उन्हें न्यूक्लियर नेशन देश माना जाता है| जिस वजह से यह लोकेशन वाले पांच देश जिसका अमेरिका,चीन ,फ़्रांस सम्मिलित थे | 


यह सब भारत को बहुत ही नीचे नजर से देखा करते रहे और उनकी नजर में भारत की कोई वैल्यू नहीं थी और अगर भारत के वैज्ञानिक  कुछ नया एक्सपेरिमेंट किया करते या परीक्षण किया करते थे तो यह नूक्लिअर नेशन वाले देश भारत को इन सभी चीजों को करने के लिए रोका करते थे पाबंदी लगा दिया करते थे |  साथ ही साथ भारत के लिए नए नए रूल बना दिया करते थे | इन्हीं सभी चीजों को देखकर भारत के सभी साइंटिस्ट जिसमें कि एपीजे अब्दुल कलाम जी, विक्रम साराभाई और सतीश धवन शामिल थे इन लोगों ने उनके ऐसे रूल को नजरअंदाज करके भूल के खिलाफ एक्सपेरिमेंट किया करते थे जिससे कि भारत के पास खुद का हथियार हो क्योंकि मैंने आपको पहले ही बताया इंटरनेशनल लेवल पर किसी भी देश की वैल्यू उसके टेक्नोलॉजी से होती है क्योंकि इस मामले में भारत बिल्कुल पीछे था |बहुत ज्यादा संघर्ष करने के और मुश्किलों के बाद एपीजे अब्दुल कलाम जी ने 

देश को भारत का पहला मिसाइल दिया और बहुत सारे हथियार दिए और सैटलाइट भी दिए हैं जैसे की अग्नि,पृथ्वी,धोनी और उनके यह संघर्ष इतने थे कि आपको इमेजिन करना काफी मुश्किल होगा क्योंकि आपको जानकर हैरानी होगी | जब एपीजे अब्दुल कलाम जी इन सभी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे तो उसी दौरान 1971 में उनके टीम के लीडर विक्रम साराभाई जी की मौत हो गई थी क्योंकि उनका इस प्रोजेक्ट में बहुत बड़ा हाथ था  और उनके बिना प्रोजेक्ट आधा अधूरा रह गया था और साथ ही साथ अब्दुल कलाम जी के मम्मी और पापा दोनों लोगों की मौत इसी दौरान हुआ थी | इसका उन्हें बहुत गहरा सदमा लगा लेकिन इतना सब कुछ होने के बाद भी काफी एक्सपेरिमेंट फेल होने के बाद भी उन्होंने अपने मिशन को पूरा किया और भारत देश को सिर्फ मिसाइल ही नहीं बल्कि बहुत कुछ दिया और आज सिर्फ उनके वजह से अमेरिका,रसिआ  यह सब बड़े बड़े देश भारत को इज्जत भरी नजर से देखते हैं | एपीजे अब्दुल कलाम जी की ऐसी मेहनत और परिश्रम के कारण वह भारत के 2002 से 2007 तक प्रेसिडेंट भी रहे | 





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